मैं शायद मानवमात्र द्वारा उपयोग किया जाने वाली उन चीज़ों में से एक हूँ ,जिन्हे हर कोई जाति ,धर्म ,और क्षेत्र के भेदभाव को भूलकर प्रयोग करता है। गरीब अमीर ,छोटा बड़ा हर कोई मुझे है। प्राचीनकाल से ही मैं मनुष्य का सुख दुःख ,गर्मी सर्दी ,हर मौसम का साथी रहा हूँ। मेरे सहारे ही लोग दुर्गम और काँटों से भरे रस्ते को बिना आह निकाले ही कितनी आसानी से पार कर जाते हैं। जब जब किसी पर विरोधी पक्ष से कोई संकट आता है ,तो लोग सबसे पहले दुश्मन के पैरों में मुझे ही पकड़कर अपनी जान बचने की कोशिश करते हैं। इतना सब पढ़ने के बाद शायद आप अंदाजा लगा ही चुके होंगे कि आप किसके बारे में पढ़ने जा रहे हैं?
फिर भी विषय को स्पष्ट करने के लिए बता दूँ कि आप एक जूते की आत्मकथा पढ़ने जा रहे हैं !!शायद पिछली दो पंक्तियों को पढ़ने पर आपको लगे कि कोई मजाक कर रहा है,भला एक जूता कैसे कुछ सोच,बोल और लिख सकता है ?
परन्तु वास्तविकता यही है की आज एक जूता अपनी आत्मकथा लिखने जा रह है। ये सब संभव है क्योंकि अगर मुझे पहनकर कोई उन दुर्गम और वीरान तथा असंभव से दिखाई देने वाले रास्तों को नाप सकते हैं ,तो एक जूते के अपनी आत्मकथा लिखने में किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए!
तो चलिए अब अधिक समय न गँवाते हुए मैं अपनी आत्मकथा लिखनी शुरु करतकरता हूँ।मैं भले ही बहुत साधारण सा,जटिलताओं से रहित दिखाई देता हूँ,परंतु मेरे विज्ञान में एक्सपर्ट लोग ही मेरी जटिलताओं को जानते हैं। मुझे मेरी निर्माण सामग्री,मेरे डिज़ाइन,मेरे आकार के आधार पर अलग अलग तरीकों से बनाया जाता है। मुझे बनाने वाले मोची अपने कला कौशल का प्रयोग करके मुझे आकर्षक रूप प्रदान करता है।
मेरे मनमोहक बनावट के आधार पर मेरा मूल्य निर्धारित किया जाता है। संभ्रांत वर्ग के लोग मेरे किसी विशेष डिज़ाइन को पाने के लिए लाखों करोडो रुपये खर्च कर देते हैं। वहीँ दूसरी ओऱ गरीब लोग अधिकतर समय सिर्फ उपयोग के आधार पर ही मुझे खरीदते हैं।
फिर मेरी निर्माण सामग्री के आधार के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया है।चमड़े के जूते,कैनवस के जूते,कपडे के जूते और न जाने कितने प्रकार की सामग्री से मुझे बनाया जाता है।
मेरे मनमोहक बनावट के आधार पर मेरा मूल्य निर्धारित किया जाता है। संभ्रांत वर्ग के लोग मेरे किसी विशेष डिज़ाइन को पाने के लिए लाखों करोडो रुपये खर्च कर देते हैं। वहीँ दूसरी ओऱ गरीब लोग अधिकतर समय सिर्फ उपयोग के आधार पर ही मुझे खरीदते हैं।
फिर मेरी निर्माण सामग्री के आधार के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया है।चमड़े के जूते,कैनवस के जूते,कपडे के जूते और न जाने कितने प्रकार की सामग्री से मुझे बनाया जाता है।
मुझे सामान्य जीवन में तो लोगों का प्यार मिलता ही है,साथ ही साथ लोग कभी कभी लीक से हटकर भी मुझे उपयोग में लाते हैं।आपको किसी का अपमान करना हहै तो आप मुझसे अच्छा साधन नहीं ढूँढ पाएँगे। आजकल के इस भयंकर गलाकाट राजनैतिक प्रतिस्पर्धा वाले युग में तो मेरा महत्तव और भी बढ गया है। अभी हाल फिलहाल की घटनाओं से मेरे उपयोग के इस पहलू पर लोगों का कुछ ज्यादा ही ध्यान जा रहा है।शायद एक जूते के रूप में उन्हें वो ब्रह्मास्त्र मिल गया है जिसका न जाने उन्हें कब से इंतजार था।
मेरा एक दूसरा महत्तवपूर्ण उपयोग साहित्य में किया गया है। मेरे इस विशेष उपयोग पर शायद मैं सबसे ज्यादा गर्वित महसूस करता हूँ। शब्द और कल्पनाओं के धनी लोगों के शब्दों मे वर्णित होने का अनुभव वास्तव में अतुल्य है।हरिशंकर परसाई जब मुंशी प्रेमचंद की सादगी को व्यक्त करने के लिए एक जूते का सहारा लेते हैं तो वो मेरी पूरी जूता प्रजाति के लिए गर्व का विषय होता है।
लोग समय,परिस्थिति के हिसाब से जूते को हमेशा उपयोग में लाते रहेंगे ।और मैं पूरी कौम की तरफ से विश्वास दिलाता हूँ कि हमेशा मैं अपनी जान की परवाह किए बिना मानवमात्र के काम आता रहूँगा।
अब बारे में इतना सब लिखने के बाद मुझे उम्मीद है कि मेरे योगदान को भी कहीं जरुर अंकित किया जाएगा जिससे हमारा उत्साहवर्धन हो।
अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी लेखनी को विराम देना चाहूँगा।अपना कीमती समय एक तुच्छ निर्जीव वस्तु के लिए देने के बहुत धन्यवाद।
अलविदा
आपका अपना जूता