साल भर पहले अगर कोई कहता कि डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका का राष्ट्रपति बनने जा रहा है तो शायद हर कोई इसे गन्दा मजाक कहकर इग्नोर कर देता। ऐसा कोई ख्याल भी दिल में रखने वाले को लोग अपने इंटेलेक्चुअल समाज से बेदखल कर देने को तैयार थे। लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था और ट्रम्प की ऐसी आँधी चली कि डेमोक्रेट्स के सारे हवाई किले बनने से पहले ही ध्वस्त हो गये।
हिलेरी क्लिंटन और ट्रम्प का मुकाबला इतना जबरदस्त होगा किसी ने सोचा न था ।एक बिजनेसमैन जिसको राजनीति का Abc तक मालूम न हो आखिर कैसे ताल ठोककर एक घाघ और मंझी हुई राजनेता को न केवल चुनौती देता है बल्कि चुनाव में एक शानदार जीत भी दर्ज करता है। वो बिजनेसमैन जिसकी इमेज एक मुँहफट और अनुशासनहीन व्यक्तित्व की है अगर एक ईमानदार और neat छवि वाली औरत को हराता है तो मन में सवाल खड़ा होता है कि आखिर कहाँ वो महिला और उसकी पूरी PR टीम गलती कर गयी या फिर कौन सा एक तुरुप का इक्का ट्र्म्प ने चला जिसको डेमोक्रट्स नहीं काट पाए।
और यही सवाल आपको स्थिति का एक गहन विश्लेषण करने पर मजबूर करता है। अगर चुनाव के पहले के पूरे घटनाक्रम पय्र फोकस करे तो आप पाएँगे कि हिलेरी के भाषण से ऐसा लगता था मानो वो कुछ कहने की बजाए छिपा ज्यादा रही है।चाहे वो तालिबान हो,ISIS हो या फिर सीरिया में छिड़ा गृहयुद्ध ,हर मुद्दे पर वो एक balanced thinking प्रोजेक्ट करना चाहती थी। आप्रवासियों और एफ्रो अमेरिकन्स जिनको ट्रम्प पहले ही धमकी दे चुका था के वोट ना खोने के चक्कर में वो इतने calculated moves चलने लगी कि पूरी चुनाव प्रक्रिया ही नीरस हो गयी ।
इसके ठीक उलट ट्रम्प महाशय अपने मुँहफट और बेबाक बोलने के अंदाज के कारण ही शायद लोकप्रियता के शिखर पर इतना ऊपर चले गये कि जहाँ डेमोक्रेट्स उनकी परछाई तक को न छू सके।हर मुद्दे पर अपने विचार रखना और इम अमेरिकी नागरिक को अपने साथ लेकर चलना शायद सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक था। आतंकवाद के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने का वादा पूरी तरह से माहौल के अनुकूल था।और मुस्लिमों के US entry को बैन करना और आप्रवासियों के लिए सख्त कानून बनाना शायद दो चीजें थी जिसके बारे में बात करना किसी भी कैंडिडेट के लिए खतरनाक साबित हो सकता था लेकिन समय की माँग थी कि इन पर discussion हो। और ट्र्म्प ने मौका देखकर आखिर आवाम को अपने लिए वोट करने का एक सख्त कारण दे दिया।कल्पना कीजिए एक देश जो अभी हाल के वर्षों मेंं ही दो मंदी झेल चुका हो,वहाँ लोगों को यकीन दिलाना कि अब लोग बाहर से आकर उनकी नौकरी नहीं छीनेंगे,अपने आप में कितना सांत्वना देने वाला होगा। और जब आप दुःखी लोगों को उनके दुःखों से उबरने का संबल देते हैं आपकी जीत अपने आप ही sure हो जाती है। शायद US दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ लडने में अपनी economy का एक बहुत बडा़ हिस्सा खर्च करता है और जब आप total wipeout of terrorists from the world का संकल्प लेते हैं तो आपके वोट बढ़ने में किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंपका नाम इतिहास के पन्नों मे स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा या नहीं,ये तो समय ही बताएगा ।लेकिन आज के लिए वो एक हीरो से कम नहीं है जिसने पूरी मीडिया के अपने खिलाफ होने पर भी पूरी guild को ऐसी पटखनी दी कि उनको संभलने का मौका तक ना मिला ।
डोनाल्ड ट्रंप एक मुँहफट,अनुशासनहीन,कैरेक्टरलैस 70 साल का ठरकी बूढा है ऐसा तो हम सब मीडिया में पहले ही सुन चुके हैंं अब उम्मीद है तो बस इतनी सी कि ये ठरकी लौंडा अपनी इच्छाओ और कामनाओं को वश में रखते हुए अमेरिका और दुनिया की भलाई के लिए काम करे।
डिस्कलेमरः ऊपर लिखे गये विचार लेखक की अपनी इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी है और आपका इससे सहमत होना या न होना कोई महत्तव नहीं रखता है।क्योंकि असहमत होके भी रियल लाईफ में तो तुम मेरा घंटा कुछ उखाड़ पाओगे।
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